सलम मर्चेंट ने हाल ही में ए. आर. रहमान को ‘रामायण’ में संगीत देने के अवसर को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि अगर ए. आर. रहमान को इस परियोजना में शामिल किया जा रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि किसी प्रकार का भेदभाव हो रहा है। मर्चेंट का मानना है कि रहमान की प्रतिभा और उनके काम की गुणवत्ता को देखते हुए उन्हें इस प्रकार के बड़े प्रोजेक्ट में शामिल करना एक स्वाभाविक निर्णय है।
सलीम मर्चेंट ने यह भी बताया कि ‘रामायण’ जैसी महाकाव्य गाथाओं में संगीत का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे प्रोजेक्ट में एक अनुभवी और विश्वसनीय संगीतकार की आवश्यकता होती है, और रहमान इस आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम हैं। उनके अनुसार, रहमान का काम हमेशा से ही भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने वाला रहा है, और उन्हें इस तरह के महत्वपूर्ण कामों में शामिल करना एक सकारात्मक कदम है।
मर्चेंट ने यह भी स्पष्ट किया कि संगीत की दुनिया में कई विभिन्न आवाज़ें और प्रतिभाएँ हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी एक कलाकार को विशेष रूप से चुनने का निर्णय उनके काम की गुणवत्ता और उनकी योग्यता पर आधारित होता है। इसलिए, यह कहना कि ए. आर. रहमान को ‘रामायण’ में शामिल करना भेदभाव है, यह सही नहीं है। ऐसा करना संगीत के क्षेत्र में नए विचारों और दृष्टिकोणों को अपनाने का एक हिस्सा है।