“जैसा करेगा, वैसा भरेगा” इस कहावत का अर्थ है कि व्यक्ति को अपने कार्यों के अनुसार फल मिलता है। यह वाक्य उस समय के लिए बहुत प्रासंगिक है जब उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज की गई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राकेश सिन्हा ने यह कहा कि जो व्यक्ति अपने कार्यों का सही आकलन नहीं करता, उसे अंततः उसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
उमर खालिद और शरजील इमाम, जो पिछले कुछ समय से विवादों में रहे हैं, के मामले में राकेश सिन्हा ने यह स्पष्ट किया कि उन दोनों के कार्यों का परिणाम ही उनकी जमानत खारिज होने का कारण बना। उन्होंने यह भी बताया कि समाज में हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए और अपने कार्यों के प्रति सचेत रहना चाहिए।
सिन्हा ने यह भी कहा कि यह घटना एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि कानून के सामने सभी समान हैं। किसी भी व्यक्ति को उसके कार्यों के आधार पर ही न्याय मिलना चाहिए। इस प्रकार, यह स्थिति एक चेतावनी है कि अपने कार्यों के परिणामों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
इस संदर्भ में, यह स्पष्ट होता है कि समाज में न्याय का एक ढांचा है जो सभी को समान रूप से प्रभावित करता है। राकेश सिन्हा के विचारों ने इस मामले में एक स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है, जो हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमें अपने कार्यों का परिणाम समझना चाहिए और उसी के अनुसार आचरण करना चाहिए।